जहां JNU में छात्र अपने अधिकार की लड़ाई लड़ रहे हैं, वहीं उनको मार खाता देखकर कुछ लोग ख़ुश भी हैं, जानिए वजह

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जेएनयू जिसका पूरा नाम है जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय। आज इस विश्वविद्यालय की चर्चा पूरे देश भर में हो रही है। जहाँ एक ओर जेएनयू के छात्र अपने हक़ की लड़ाई लड़ रहे हैं। वहीं दूसरी ओर उनपर लाठी चार्ज और मार खाता देख कुछ लोग ख़ुश भी हो रहे हैं।

JNU Protest



दरअसल जवाहरलाल नेहरू जी का नाम आते ही विचाधाराएं दो ध्रुवों में विभाजित हो जाती हैं। एक विचारधारा नेहरू जी से प्रभावित दिखती है तो दूसरी उनसे घृणा करती हुई नजर आती है।

मामला है शुल्क वृद्धि का, जहाँ छात्र उस शुल्क वृद्धि को कम कराने और पहले जैसा ही बनाये रखने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। छात्रों का ऐसा कहना है कि वो शांतिपूर्ण प्रदर्शन करना चाह रहे हैं पर उन पर लाठी चार्ज किया गया।

अब आते हैं उन लोगों पर जो जेएनयू में पढ़ने वालों या यूं कहें लेफ्टिस्ट,कम्युनिस्ट विचारधाराओं वाले वर्गों से नफरत करते हैं। हांलाकि भारत का संविधान इतना लचीला है कि वह धार्मिक स्वतंत्रता का और बोलने की आज़ादी का दोनों का ही अधिकार देता है।

पर कुछ लोग चाहते हैं उनकी इच्छानुसार ही देश चले। वो जिस धर्म को मानते हैं उसी को सभी मानें। वो जैसे जीते हैं, वैसे ही सभी जियें। बात जब पर्सनल हो जाती है तो उसके परिणाम भी घातक होते हैं।

वही आजकल हो रहा है। लोग मानसिक रूप से बीमार हो रहे हैं। लोगों को चोट देखकर ख़ुशी हो रही है। बात ये है कि जब इंसान बदला लेना चाहता है तो वह इंसानियत भूल जाता है।

शुल्क वृद्धि की लड़ाई तो ये है ही पर उससे कहीं ज़्यादा ये विचारधाराओं की भी लड़ाई है।

जेएनयू के छात्रों का सोशल मीडिया में जितना समर्थन किया जा रहा है उतना ही विरोध भी।

जेएनयू का समर्थन करने वालों का कहना है कि अगर भक्तों ( बीजेपी या राइट विंग का आंख बंद करके समर्थन करने वालों को दिया गया नाम) को लगता है कि यह शुल्क वृद्धि का विरोध सिर्फ लेफ्ट या कम्युनिस्ट विचारधारा वाले कर रहे हैं तो यह सरासर गलत है। एबीवीपी जो कि राइट विंग समर्थक छात्र संघ है, वह भी शुल्क वृद्धि के खिलाफ हैं। ऐसा जेएनयू छात्रों के समर्थकों का कहना है और एबीवीपी JNU के फेसबुक पेज का स्क्रीनशॉट भी उदाहरण के तौर पे देते हैं ये लोग।

ये रहे स्क्रीनशॉट्स-



ये तो थी बात जेएनयू का समर्थन करने वाले वर्ग की। अब जो विरोध कर रहे हैं या जो मार खाता देख ख़ुश हो रहे हैं जिन्हें मज़ा आ रहा है, उनके तर्क भी जान लेते हैं। उनकी निजता का सम्मान करते हुए लेखक उनके स्क्रीनशॉट्स तो नही लगा रहा है परंतु उनके तर्कों को आप तक ज़रूर पहुंचाएगा।

अब आजकल सोशल मीडिया और व्हाट्सएप्प के जमाने मे हर इंसान ख़ुद को स्कॉलर समझने लगा है। जहाँ जेएनयू समर्थक ख़ुद को लॉजिकल और प्रगतिशील मानते हैं या समझते हैं उधर उनका विरोध करने वाले भी सबूत इत्यादि लेकर चलने लगे हैं।

किसी समर्थक ने पोस्ट किया उस पर विरोधी ने कमेंट किया और कहा –

10000का मोबाईल,2000की टीशर्ट4000 की जींस 8000 के जूते 300 की लिपस्टिक लगाकर JNU के अंकल आंटी चिल्ला रहे हैं हॉस्टल फ़ीस ज्यादा है।

फिर उन्होंने जेएनयू प्रदर्शन में प्रयोग किये जा रहे ड्रम की कीमत की तस्वीर भी दिखाई। यह रही तस्वीर-

via Facebook

 यहीं पर विरोधी नही थमते उनके पास आज कई तर्क हैं। कुछ तर्क और पढ़िये। –


  • 2019 – विवेकानंद जी की मूर्ति के साथ अभद्रता
  • 2016 – किसी विद्यार्थी को नशा कराकर AISA एक्टिविस्ट द्वारा उसका रेप।
  • 2016- अफ़ज़ल गुरु इवेंट
  • 2013-14 – माँ दुर्गा को वैश्या बताना
  • 2013- नक्सल के साथ सम्बन्ध में कुछ विद्यार्थी गिरफ्तार हुए
  • 2010- 76 जवानों के नक्सल द्वारा मारे जाने पर उत्सव मनाना

 तो ऐसे दे रहे समर्थक और विरोधी एक दूसरे को तर्क। दोनों एक दूसरे को नीचा दिखाने का मौका नही छोड़ते। आज के इस माहौल में जहाँ कुछ हल निकालने के बारे में सोचना चाहिए वहाँ लोग चुटकी ले रहे हैं मज़े कर रहे हैं।

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